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Chhatriwali Trailer: सतीश कौशिक ने याद दिलाई फिल्म ‘गुप्तज्ञान’

Chhatriwali Trailer: यौन शिक्षा और सुरक्षित सेक्स जैसे विषय पर स्थापित फिल्म 'छतरीवाली' के ट्रेलर लांच के मौके पर निर्देशक और अभिनेता सती.....

Chhatriwali Trailerयौन शिक्षा और सुरक्षित सेक्स जैसे विषय पर स्थापित फिल्म ‘छतरीवाली’ के ट्रेलर लांच के मौके पर निर्देशक और अभिनेता सतीश ने इस बात पर खुशी जताई कि बीते दो तीन दशक में बढ़ती हुई पीढ़ी का सेक्स एजूकेशन को लेकर नजरिया बदल चुका है। उन्होंने उसके पहले के दशक में रिलीज हुई फिल्म ‘गुप्तज्ञान’ का खासतौर से चर्चा किया।

सुबह 10 बजे के शोज में चलने वाली इस फिल्म को देखना तो दूर लोग सामान्य बातचीत में इसका नाम तक लेने से कतराते थे, जबकि ये सेक्स एजूकेशन पर बनी एक महत्वपूर्ण फिल्म मानी जाती है। फिल्म में रकुल प्रीत सिंह भी लीक से इतर एक ऐसी भूमिका करने जा रही हैं जो नई पीढ़ी के सितारों मसलन आयुष्मान खुराना और नुसरत भरूचा की खींची लकीर को लंबा करने की कोशिश करेंगी ।

फिल्म ‘छतरीवाली’ में लीड रोल निभा रहीं रकुल प्रीत सिंह: Chhatriwali Trailer

  • फिल्म ‘छतरीवाली’ में लीड रोल निभा रहीं अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह बोलती हैं.
  • ‘शिक्षा ही असली सुरक्षा है। युवा पीढ़ी में अब भी कुछ लोग ऐसे हैं.
  • जो समझते हैं कि चुंबन से लड़कियां गर्भवती हो सकती हैं।
  • हमारे समाज में सेक्स एजुकेशन इसलिए भी बहुत जरूरी है.
  • चूंकि बार बार अबॉर्शन कराने से कई महिलाओं की जान भी जा चुकी है।
  • रकुल प्रीत कहती है की जब मैं नौवीं कक्षा में थी.
  • तब मैंने बायोलॉजी में सेक्स के बारे में पढ़ लिया था।
  • अगर आप को शुरू से ही इस बारे में ज्ञान रहे तो आप कभी भी अपने रास्ते से नहीं भटकेंगे।
  • यह फिल्म समाज के रूढ़िवादी लोगों द्वारा बनाई गई यौन वर्जन के विषय पर एक बदलाव लेकर आती है।’

सुमित व्यास भी एक खास किरदार निभा रहे हैं: Chhatriwali Trailer

फिल्म’छतरीवाली’ में सुमित व्यास भी एक खास किरदार निभा रहे हैं।

वहीं फिल्म के निर्देशक तेजस बताते हैं कि

इस फिल्म को बनाने स पहले उन्होंने देश के अलग अलग इलाकों में जाकर काफी शोध भी किया।

वह बताते हैं, ‘फिल्म ‘छत्रीवाली’ के लिए रिसर्च करते समय मैं भारत के कुछ ग्रामीण इलाकों में भी गया.

और वहां के छात्रों और ग्राणीण लोगों से बात-चित की।

https://www.youtube.com/watch?v=q5HmO12S7iA

मैंने सेक्स शब्द और समाज के साथ साथ फार्मासिस्टों के आलोचनात्मक रवैये के के इर्द गिर्द एक वर्जना देखी है। अधिक दिलचस्प और खतरनाक बात यह दिखा कि महानगरों में कुछ इलाकों को छोड़कर बाकी शहरी आबादी की सोच भी गांवों से कुछ खास अलग नहीं है।’

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