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खामोशी बेवजह नहीं होती, कुछ दर्द आवाज छीन लेते हैं…

कैथल: खामोशी बेवजह नहीं होती, कुछ दर्द आवाज छीन लेते हैं… सिद्धू मूसेवाला (Siddhu moosawala murder case) के पिता बलकार(Balkar Singh) सिंह ने बयां किया दिल का दर्द बोले… पंजाबी गीत व संगीत के बेताज बादशाह रहे स्वर्गीय शुभदीप सिंह मुसेवाला के पिता बलकौर सिंह शनिवार को एक कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए गुहला के पूर्व विधायक कुलवंत बाजीगर के घर चीका पहुंचे। सांसद नायब सिंह सैनी तुरंत बाजीगर ने उनका स्वागत किया। हिंदुस्थान समाचार से बातचीत में नपे-तुले शब्दों में उन्होंने अपने पुत्र को खो देने की पीड़ा कुछ यूं बयां किया कि मौके पर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गई। उन्होंने कहा कि ‘खामोशी बेवजह नहीं होती, कुछ दर्द आवाज छीन लेते है। बलकौर सिंह ने कहा कि एक पुत्र के खो जाने का दर्द कितना होता है, इसका आभास केवल उस पिता को ही हो सकता है। जिसने अपने युवा पुत्र को खो दिया हो, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सिद्धू की मौत से जहां उन्होंने बहुत कुछ खोया है, परंतु उसके साथ साथ उन्होंने पाया भी बहुत कुछ है।

हीरा खोने के बाद हुआ कीमत का अहसास…

उन्होंने कहा कि मूसेवाला (Siddhu moosawala) के रूप में उसके घर में भगवान ने एक नायाब हीरे को जन्म दिया था। परंतु अफसोस है कि हम उसे पहचान नहीं पाए और ना ही बचा पाए। उन्होंने कहा कि मुस्सेवाला के हीरा होने का उन्हें भी उसकी मौत के बाद ही पता चला, जबकि इससे पहले वे सामान्य तौर पर यह मानकर चल रहे थे कि अन्य गायकों की तरह उनका पुत्र भी एक गायक ही है और उसने गायकी का धंधा रोजी-रोटी कमाने के लिए ही चुना हुआ है। बलकौर सिंह ने कहा कि मुस्सेवाला की मौत के बाद जब उन्होंने उनके प्रति लोगों का जनून देखा तो तब जाकर अहसास हुआ कि उन्होंने पुत्र के रूप में कुदरत के एक नायाब हीरे को खो दिया है।

कानूनी फंदे से बाहर घूम रहे हत्यारे…

मुसेवाला कत्ल के षड्यंत्रकारी कानूनी फंदे से बाहर बलकौर सिंह ने कहा कि मुसेवाला (Siddhu moosawala) का कत्ल करवाने वाले असली षड्यंत्रकारी तो अभी भी कानूनी फंदे से बाहर हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उसकी हत्या की वे भाड़े के लोग थे परंतु असली हत्यारे तो कोई ओर हैं, जिन्हें ढूंढना जरूरी है। बुजुर्गों से सुना था कि मौत बलवान होती है और कोई चाहे लाख प्रयत्न कर ले, परंतु मौत अपना रास्ता स्वयं बना लेती है। उन्होंने कहा कि वे अपने पुत्र के साथ 24 घंटे एक साए की तरह रहते थे, परंतु जिस दिन उन पर हमला हुआ, उनसे भी थोड़ी चूक हो गई। उन्होंने कहा कि फिर भी उन्हें गर्व है कि उसके पुत्र ने पीठ में गोली नहीं खाई और कातिलों से लड़ते-लड़ते शहीद हुआ है। उन्होंने कहा कि कातिलों के पास इतने आधुनिक हथियार होने से ही पता चलता है कि मुसेवाला के कत्ल की बड़े स्तर पर साजिश रची गई।

कैसे हुई मूसेवाला की मौत

जैसा कि लॉरेंस बिश्नोई गुट(Lawrence Bishnoi Gang) के ऊपर मूसेवाला की हत्या का आरोप है कि 29 मई को पंजाब के मनसा जिले में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के सदस्यों द्वारा कथित तौर पर पंजाबी गायक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। स्पेशल सेल ने 19 जून को शार्पशूटर प्रियव्रत (Privrat), कशिश(Kashish) और केशव(Keshav) को गिरफ्तार किया था, जिन्होंने पूछताछ में अन्य आरोपियों के शामिल होने का खुलासा किया। आगे की जाँच में सचिन भिवानी(Sachin Bhiwani) , लॉरेंस बिश्नोई (Lawrence Bishnoi)-गोल्डी बराड़ (Goldi Barad)-काला जथेड़ी(Kala Jatheri) जैसे अपराधियों का नाम भी इस केस के साथ जुडा हुआ है।

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